कोटपूतली-बहरोड़ के नायक गोवर्धन गुर्जर का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार | वीरता और बलिदान की कहानी
Kotputli-Behror Hero Goverdhan Gurjar
कोटपूतली-बहरोड़ : Kotputli-Behror Hero Goverdhan Gurjar, राजस्थान की वीर धरा ने एक और सपूत खो दिया है। कोटपूतली-बहरोड़ जिले के दामोदर का बास (हरसौरा) निवासी सेना के नायक 38 वर्षीय गोवर्धन गुर्जर का हरियाणा के हिसार में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से निधन हो गया। सोमवार को हुई इस दुखद घटना के बाद मंगलवार शाम सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर लौटे थे गोवर्धन
नायक गोवर्धन गुर्जर भारतीय सेना की 2 गार्ड्स बटालियन में हिसार में तैनात थे। नियति का क्रूर खेल देखिए कि वे एक महीने की लंबी छुट्टी बिताने के बाद शनिवार को ही वापस ड्यूटी पर लौटे थे। किसे पता था कि परिवार के साथ बिताए वे पल आखिरी होंगे। सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ने और हार्ट अटैक आने से वे वीरगति को प्राप्त हुए।
तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे जैसे ही जवान की पार्थिव देह हमीरपुर पहुंची, पूरा इलाका 'गोवर्धन गुर्जर अमर रहे' के नारों से गूंज उठा। जवान के सम्मान में 6 किलोमीटर लंबी भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने भाग लिया। शाम 5:30 बजे पैतृक गांव में सैन्य सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। बड़े बेटे अंकित ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
इधर जवान का पार्थिव देह घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। पत्नी कला देवी पति का शव देख सुध-बुध खो बैठीं, वहीं बुजुर्ग मां अणची देवी का विलाप देख हर आंख नम थी। 13 वर्षीय बेटी मोना की चीखें 'पापा मुझे नहीं पता था आप ऐसे आओगे' वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा चीर रही थीं।
पीछे छोड़ गए भरा-पूरा परिवार
2008 में सेना में भर्ती हुए नायक गोवर्धन अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। वे अपने पीछे पत्नी, एक बेटी और दो मासूम बेटों (11 और 8 वर्ष) को छोड़ गए हैं। वे वर्तमान में परिवार के साथ कोटपूतली में रह रहे थे ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला सकें।